Home Shubh Muhurat 2020 | शुभ मुहूर्त 2020 पंचक 2020 तिथि और समय | Panchak 2020 Date & Time

पंचक 2020 तिथि और समय | Panchak 2020 Date & Time

shubh muhurat

पंचक 2020 : किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने से पहले मुहूर्त की आवश्यकता होती है. गलत समय पर शुरू किये कार्य को पूर्ण होता नहीं दिखाई देता. इसलिए शुभ मुहूर्त की आवश्यकता नुसार हमें पंचांग देखना जरुरी है. किसी मुहूर्त को निर्धारित करने के लिए, वार, तिथि नक्षत्र, करण और योग की जानकारी होना आवश्यक है. मुहूर्त का निर्धारण करने से पहले कुछ बातोंका ध्यान रखना जरुरी है. उसमे पंचक शुरू और समाप्त होने का समय बहुत हि महत्वपुर्ण होता है. यहाँ पंचक कॅल्क्युलेटर दिया है, जिससे हम पंचक की जानकारी पा सकते है.

पंचक 2020 दिनांक और समय

जनवरी 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
26 जनवरी सायं 5.39 बजे से 31 जनवरी सायं 6.11 बजे तक
फरवरी 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
22 फरवरी मध्य रात्रि 1.29 बजे से 27 फरवरी मध्य रात्रि 1.07 बजे तक
मार्च 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
21 मार्च प्रातः 6.20 से 26 मार्च सायं 7.15 बजे तक
अप्रैल 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
17 अप्रैल दोपहर 12.16 22 अप्रैल दोपहर 1.18 बजे तक
मई 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
14 मई सायं 7.20 से 19 मई सायं 7.53 बजे तक
जून 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
10 जून मध्य रात्रि बाद 3.40 से 15 जून मध्य रात्रि बाद 3.18 बजे तक
जुलाई 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
8 जुलाई दोपहर 12.31 से 13 जुलाई प्रातः 11.15 बजे तक
अगस्त 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
4 अगस्त रात्रि 8.47 से 9 अगस्त सायं 7.05 बजे तक
31 अगस्त मध्य रात्रि बाद 3.48 से 5 सितंबर मध्य रात्रि बाद 2.22 बजे तक
सितंबर 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
28 सितंबर प्रातः 9.39 से 3 अक्टूबर प्रातः 6.37 बजे तक
अक्टूबर 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
25 अक्टूबर दोपहर 3.24 से 30 अक्टूबर दोपहर 2.56 बजे तक
नवंबर 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
21 नवंबर रात्रि 10.24 से 26 नवंबर रात्रि 9.20 बजे तक
दिसंबर 2020 पंचक दिनांक और समय
पंचक आरंभ काल पंचक समाप्ति काल
19 दिसंबर प्रातः 7.16 से 23 दिसंबर के 4.32 बजे तक

क्या है पंचक ?

ब्रम्हांड में कुल २७ नक्षत्र है. इन २७ नक्षत्रों में ५ नक्षत्र कुछ ऐसे है. इन ५ नक्षत्रों शुभ कार्यके लिए अशुभ माना जाता है. इसलिए शुभ महूर्त के लिए पंचांक देखना अनिवार्य बन जाता है. छोटे तारोंका समूह से नक्षत्र बन जाते है, सव्वा दो नक्षत्रो के समूह से १२ राशियां बन जाती है. ब्रम्हांड का अंश ३६० डिग्री है. बारे राशि में से प्रत्येक राशि का अंश ३० डिग्री होता है. जब चन्द्रमा कुंभ और मीन राशि से गोचर करता है. तो उस समय पंचक शुरू होता है.

पंचक के पांच दिन और पांच नक्षत्र

प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते है. धनिष्ठा नक्षत्र से तीसरे चरण से कुंभ राशि का प्रारंभ होता है. इस के बाद शतभिषा, पूर्वा भाद्रपद, उत्तरा भाद्रपद और रेवती नक्षत्र आते है. जब चन्द्रमा धनिष्ठा नक्षत्र से तीसरे चरण से शुरुवात करते है. और चन्द्रमा रेवती नक्षत्र से भ्रमण पूर्ण करने का समय पांच दिन का होता है. इसी पांच नक्षत्र और इन बिच के पांच दिन को पंचक कहा जाता है. चन्द्रमा के अखंड गोचर करने से प्रत्येक २७ दिन के बाद पंचक की पुनरावृत्ती हो जाती है.

क्या होता है पंचक में

माना जाता है, अगर पंचक में कोई अशुभ कार्य घटता है. तो इस अशुभ कार्य की पांच बार पुनरावृत्ति हो जाती है. इसका मतलब इस कार्य के बाद फिर से वो अशुभ कार्य घटना घडती है. इसीलिए पंचक के दौरान हुए अशुभ कार्य का निवारण करना आवश्यक है. विशेष रूप में अगर किसी व्यक्ति की मृत्यु पंचक के दौरान हो जाये तो, परिवार के अन्य पांच व्यक्तियों पर मृत्यु के सैम तुल्य संकट गहराता है. इसी कारन उस व्यक्ति अग्नि संस्कार के साथ, आते और चावल से बने ५ पुतलोंका भी दाह अग्नि संस्कार किया जाता है, ताकि परिवार वालों को कोई कष्ट ना हो.