आज की पंचांग तिथि और समय, 14 May 2021

panchang tithi

आज की पंचांग तिथि और समय, 14 May 2021

14 May 2021

तिथि : अगले दिन 15 May, 7:48:05 AM तक

तिथि विशेष: जया तिथि - सारांश : व्यवसाय, विवाह तथा शिशु का भोजन प्रारम्भ करने के लिए शुभ।

पंचांग तिथि गणना क्या है ?

पंचांग पांच अंगो से बना है. पांच अंगो में से तिथि एक महत्वपूर्ण अंग है. तिथि चंद्रमास के अनुसार एक दिन की होती है. तिथि के अनुसार वार, किसी की जयंती या पुण्यतिथि का चयन करना आसान हो जाता है. सूर्य से चन्द्रमा 12 डिग्री का अंतर् बनने पर एक तिथि का निर्माण होता है. चंद्रमास में कुल 16 तिथियां होती है. जो चंद्रमास में दो बार आती है, लेकिन इसमें अमावस और पूर्णिमा चंद्रमास में एक ही बार आती है. एक चंद्रमास में कुल 30 तिथियां आती है. जिसमे से पहली 15 तिथियां शुक्ल पक्ष में, जिसमे बाकि 15 तिथियां कृष्ण पक्ष में विभाजित किया गया है. चन्द्रमा भ्रमण 12 कला (अंश या डिग्री) से एक तिथि का निर्माण होता है. एक तिथि में पांच अंग माने जाते है. जिसे नंदा, भद्रा, रिक्ता, जया और पूर्णा कहा जाता है.

वैदिक ज्योतिष में पंचांग का अनन्य साधारण महत्व है.

शुभ और अशुभ तिथियों का उपयोग नवीनतम कार्य करने के लिए, तथा मुहूर्तोंका निर्धारण के लिए उपयोग होता है. तिथियोंके नाम इस प्रकार है - अमवास्या, पूर्णिमा, प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी और चतुर्दशी.

तिथियों का विस्तार से जानने के लिए तिथियोंका अध्ययन दो विभागों में करना होगा, शुक्ल पक्ष और कृष्ण पक्ष, चंद्रमास में प्रथम 15 तिथियां शुक्ल पक्ष में आती है. तथा बाकि 15 तिथियां कृष्ण पक्ष में है.

पप्रथम / प्रतिपदा

सभी प्रकार के शुभ कार्य, तथा धार्मिक कार्य, होम हवन, पूजा विधि करने के लिए प्रथम / प्रतिपदा तिथि अत्यंत उपयुक्त मानी गई है. प्रथम / प्रतिपदा तिथि के अधिपति देवता अग्नि है.

द्वितीया / विद्या

नया मकान बनाने हेतु, एवं स्थापत्य जैसे नई चीजोंके मुहूर्त के लिए द्वितीया / विद्या तिथि अच्छी मानी जाती है. द्वितीया / विद्या तिथि के अधिपति ब्रम्हदेव को माना जाता है.

तृतीया / तीज

मुंडन करने, नाख़ूनोंका कटवाना, बाल काटने के लिए तृतीया / तीज तिथि को उत्तम माना गया है. तृतीया / तीज तिथि की अधिपति देवता गौरी है.

चतुर्थी / चौथ

शत्रुओं को परास्त करने के लिए, किसी युद्ध की शुरुवात करने के लिए चतुर्थी / चौथ तिथि को उपयुक्त माना गया है. चतुर्थी / चौथ तिथि की अधिपति देवता यमदेव और भगवन गणेश है.

पंचमी

शल्य कर्म करने के लिए, वैद्यकीय चिकित्सा करने के लिए पंचमी तिथि को अति उत्तम माना गया है. पंचमी तिथि के अधिपति नाग देवता है.

षष्ठी

सामाजिक दुरी को मिटने के लिए, यात्रा या उत्स्व का आयोजन करने लिए, नए मित्र बनाने के लिए षष्टी तिथि का प्रयोग करना अच्छा माना जाता है. षष्ठी तिथि के अधिपति देवता स्वामी कार्तिकेय हैं.

सप्तमी

किसी नई चीजोंकी खरीददारी करने के लिए. नई यात्रा की शुरुवात करने के लिए सप्तमी तिथि अति उत्तम मानी जाती है. सप्तमी तिथि पर सूर्यदेव का अधिपत्य है.

अष्टमी

विजय प्राप्ति के लिए, तथा अष्टमी के दिन भगवान रूद्र की पूजा करना अच्छा माना जाता है. अष्टमी का शिव का माना जाता है. परन्तु शुक्ल पक्ष में भगवान् शिव की पूजा करना वर्जित है.

नवमी

नवमी तिथि का दिन विनाश, हिंसा के समर्पि होता है. तथा नए युद्ध की शुरुवात नवमी पर करना लाभदाई होता है. इस तिथि पर यात्रा करना वर्जित माना जाता है. नवमी तिथि पर देवी अम्बिका का स्वामित्व है.

दशमी

धार्मिक, पूजा विधि, शुभ और पवित्र कार्योंके लिए दशमी तिथि को अत्यंत शुभ माना जाता है. धर्मराज दशमी तिथि के स्वामी है.

एकादशी

एकादशी तिथि हिन्दू मान्यताओं के अनुसार अत्यंत शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान् शिव के उपवास भी रखा जाता है. एकादशी के दिन व्रत और पूजा की जाती है. एकादशी तिथि पर भगवान् शिव का स्वामित्व है

द्वादशी

धार्मिक क्रिया कर्म, धार्मिक अनुष्ठान के लिए द्वादशी का दिन अत्यंत शुभ माना जाता है. द्वादशी तिथि पर भगवान् विशु का स्वामीत्व है.

त्रयोदशी

कामुक सुखोंकी प्राप्ति करने के लिए, नए मित्र बनाने के लिए किसी उत्सव या समारोह का आयोजन करने के लिए त्रयोदशी तिथि दिन अत्यंत शुभ माना जाता है. त्रयोदिशि तिथि पर कामदेव का स्वामित्व है.

चतुर्दशी

बहुत या प्रेत की बाधा दूर करने के लिए, तंत्र मंत्रो की साधना करने के लिए, नयी सिद्धियोंकी प्राप्ति के लिए, चतुर्दशी का दिन शुभ माना जाता है. चतुर्दशी तिथि पर माँ देवी काली का स्वामित है.

पूर्णिमा

व्रत और पूजा का अनुष्ठान, कथा वचन करने के लिए, मन पर विजय प्राप्ति के लिए यह पूर्णिमा तिथि का दिन शुभ होता है. पूर्णिमा तिथि पर चन्द्रमा का स्वामित्व है.

अमावस्या

पितृओंकी शांति करने के लिए, इस दिन पितरोंकी सेवा करने के लिए अच्छा माना जाता है. किस व्रत वैकल्य करने के लिए अमावस्या के लिए अच्छा दिन होता है.