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हर व्यक्ति के जीवन में पैसों की तंगी का लंबा समय जरूर आता है, जाने आपका समय कब है ?

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आज के समय एक अच्छा जीवन व्यतीत करने के लिए अच्छा बैंक बैलेंस तथा हर महीने आमदनी की जरूरत होती है. हर मिडल क्लास व्यक्ति के लिए हर महीने खर्चे और आय का तालमेल लगाना उसके लिए एक चुनौती बन जाती है. खर्चे कई ज्यादा होते है, तो आमदनी उससे कई कम होती है. यह वक्त इतना कठिन होता है, की पैसे आने के लगभग सारे मार्ग बंद हो जाते है. हर किसी इंसान के जीवन में यह समय लगभग दो या तीन बार आता है, और यह समय करीब ढाई साल तक चलता है. यह समय काफी लंबा होने के कारन इंसान के आत्मविश्वास में कमी आ जाती है, और वो टूटने लगता है. आइये जानते है की वो कौन से कारन है, और यह समय आपके जीवन में कब आता है ?

इस योग में शनि आपके लिए शुभ है या अशुभ है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता

नौ ग्रहो में शनि को सबसे मंद गति का ग्रह कहा जाता है. शनि को एक राशि से दूसरे राशि में ट्रैवल करने के लिए करीब ढाई साल का समय लगता है. शनि जिस भाव में भी बैठते है उस भाव के फल की वृद्धि करा देते है. चाहे वो भाव शुभ हो, या अशुभ. शनि को तीसरी, सातवीं और दसवीं ऐसी तीन विशेष दृष्टियाँ प्राप्त है. शनि अपनी विशेष दृष्टी से जिस भाव को भी देखते है, उस भाव के फल धीमे होने लगते है. कई बार इस भाव के बुरे भी फल मिलते है. इस योग में शनि आपके लिए योगकारक है, अशुभ है, शुभ है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. क्यूंकि शनि सबके लिए बराबर न्याय देता है.

ऐसे में गोचर शनि अगर किसी जातक कुंडली में पांचवे भाव में आजाये, तो उनकी तीसरी दृष्टी सातवे भाव को देखती है, और सातवीं दृष्टी लाभ यानि ग्यारवे भाव को देखती है, तो दसवीं दृष्टी धन भाव यानि दूसरे भाव को देखती है.

कुंडली में सातवा, ग्यारवा और दूसरे भाव का फल

इससे पहले जानते है, कुंडली में सातवा भाव, ग्यारवा भाव और दूसरा भाव क्या फल देते है. ऊपर दिए कुंडली के तीनो भाव व्यवसाय या नौकरी संबंधित है.
जैसे सातवा भाव जातक के भागीदारी या पार्टनरशिप का है, ग्यारवा भाव जातक की हर हफ्ते, महीने को मिलने वाली कमाई का होता है. तो कुंडलीका दूसरा भाव धन भाव यानि बैंक बॅलन्स, या संचित धन का होता है.

शनि अपनी तीसरी दृष्टी से कुंडलीके सातवे भाव को देखने के कारन भागीदारी व्यवसाय में समस्या, भागीदारी में विच्छेद, व्यावसायिक भगीदार से ख़राब रिश्ते, भागीदारी में धोकाधड़ी ऐसे अनुभव मिलते है.

शनि अपनी सातवीं दृष्टी से ग्यारवे भाव को देखने के कारन हर महीने हफ्ते में आनेवाली आय या कमाई बढ़ने पर रोक लगती है, इन दिनों कर्मचारियोंकी सैलरी इंक्रीमेंट हो नहीं पाती है. कभी कभी जातक की पहले से ज्यादा आय या कमाई घट जाती है. अगर किसी को उधार दिए हुए पैसे हो तो उधारी के पैसे वापस मिलना, ना के बराबर होता है. जातक जितना महीने का कमाता है, उससे ज्यादा खर्च करता है, महीने की कमाई आने से पहले ही जातक के पैसे खर्च करने के सारे तरीके नियोजित होते है.

शनि अपनी दसवीं दृष्टी दूसरे यानि धन भाव पर डालने के कारन धन की हानि हो जाती है, यानि जो जमा किया हुआ धन या बैंक बॅलन्स हो उसे खर्च करने की जरूरत पड़ती है. इन दिनों जातक अपने धन में अधिक संपत्ति जुटा नहीं पाता. किसी न किसी कारणवश जातक अपनी संपत्ति, या जमा धन खर्च करता है, या उसे खो देता है.

क्या सभी पर इसका समान रूप से असर होता है ?

अगर १० साल के आयु के एक बच्चे के कुंडली में गोचर शनि पांचवे भाव से जा रहे है, या पांचवे भाव में बैठे है, और यह लड़का अपनी माता पिता पर निर्भर है, तो इसका असर उसपर ज्यादा नहीं होगा. इस पर अगर असर हुआ तो इस को अपने माता पिता से पॉकेट मनी मिलने में कठिनाइयाँ हो सकती है. जिसकी जीतनी संपत्ति या कमाई होगी, उसको उसी हिसाब से इस समय का संघर्ष करना पडेगा. इसका मतलब आपकी व्यावसायिक भागीदारी पहले से होगी तभी भागीदारी में दिक्कते आएंगी.

अगर जातक के सातवे ग्यारवे या दूसरे भाव पर शुभ ग्रहों की दृष्टी हो, तो ऐसे वक्त आपको कठिनाइयों का समाना जरूर करना पड़ता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर उस भाव से सम्बंधित कोई ना कोई सहायता जरूर मिलती है. यानि कुंडली में दूसरे भाव पर शुभ ग्रह ग्रुरु की दृष्टी हो, और गोचर शनि की दसवीं दृष्टी दूसरे भाव पर पड़ती है, तो जातक को पैसोंकी कमी जरूर पड़ेगी, और उसके पास उतने ही पैसे आएंगे जितना उसको जरूरत हो.

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