Home Panchang, Hindu calender in Hindi 2020 | पंचांग 2020

Panchang, Hindu calender in Hindi 2020 | पंचांग 2020

shubh muhurat

क्या है पंचांग ?

पंचांग, (Panchang) पंचांगम एक हिन्दू कैलेंडर (Hindu calender) है. जो खगोलीय घटनाओं पर निर्धारित है. पंचांग में खगोलीय जानकारी को सारणीबद्ध किया जाता है. जिसका उपयोग ज्योतिष या हिन्दू धार्मिक विधान करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है. किसी घटना घटनेपर विशिष्ट नक्षत्र, करण या योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते है. यह जानकारी ज्योतिष अनुमान द्वारा मिल सकती है. पंचांग का उपयोग कर ज्योतिष गणना द्वारा राशिफल दिया जाता है.

पंचांग (Panchang) शब्द का उपयोग संस्कृत से किया जाता है. पंचांग (Panchang) यानि पांच अंग जो ऊर्जा स्त्रोतोंका प्रतिनिधित्व करते है. यह स्त्रोत दृश्य और अदृश्य दोनों में शामिल है. स्थान या क्षेत्र, समय, तारिक आदि, किसी मुहूर्त के लिए सटीक पंचांग का परिणाम बहुत ही महत्वपूर्ण है. तीथि, योग, वर, नक्षत्र और करण पंचांग की पांच विशेषताएं है. पंचांग की इन पांच विशेषताए जब किसी खास कारन के लिए संतुलन बनाये रखने पर, उसे मुहूर्त कहा जाता है. धार्मिक विधि, विधान करने के लिए, किसी कार्य का प्रयोजन करने के लिए, शुभ मुहूर्त बहोत ही महत्वपूर्ण बन जाता है.

पंचांग की जरुरत ?

पंचांग का उपयोग मुख्यत्वे, काल गणना, तिथि वार, व्रत, शुभ मुहूर्त, देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. ज्योतिष गाइड के दैनिक पंचांग में नक्षत्र, योग, करन सहित, शुभ – अशुभ समय, मुहूर्त, चंद्र बल, तारा बल पंचांग में आसानीसे उपलब्ध है.

पंचांग (Panchang) का निर्धारण, ब्रम्हांड की गति पर निर्भर है. इसलिए जैसे जैसे पृथ्वी भ्रमण करती है, पंचांग समय क्षेत्र के अनुसार बदलता दिखाई देता है. इसलिए एक ही पंचांग अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग हो सकता है. इसलिए सही पंचांग का समय निर्धारण के लिए, क्षेत्र को चुनना अति महत्वपूर्ण है.

तारीख :
मंगलवार, सितम्बर २९, २०२० पंचांग
सूर्योदय :
०६ :१८
सूर्यास्त :
१८ :१६
हिन्दु सूर्योदय :
०६ :२२
हिन्दु सूर्यास्त :
१८ :१२
चन्द्रोदय :
१७ :०८
चन्द्रास्त :
सूर्य राशि :
कन्या
चन्द्र राशि :
कुम्भ
सूर्य नक्षत्र :
हस्त
 
 
द्रिक अयन :
दक्षिणायण
द्रिक ऋतु :
शरद
वैदिक अयन :
दक्षिणायण
वैदिक ऋतु :
शरद
हिन्दु लूनर दिनांक
शक संवत :
१९४२ शर्वरी
चन्द्रमास :
आश्विन (अधिक) - अमान्त
विक्रम संवत :
२०७७ प्रमाथी
 
आश्विन (अधिक) - पूर्णिमान्त
गुजराती संवत :
२०७६
पक्ष :
शुक्ल पक्ष
तिथि :
त्रयोदशी - २२ :३३ तक
 
 
नक्षत्र, योग और करण
नक्षत्र :
योग :
शूल - १९ :२६ तक
प्रथम करण :
कौलव - ०९ :४३ तक
 
 
द्वितीय करण :
तैतिल - २२ :३३ तक
 
 
अशुभ समय
दुर्मुहूर्त :
०८ :४४ - ०९ :३१
वर्ज्य :
०६ :३० - ०८ :१४
 
२३ :०४ - २३ :५३
 
 
राहुकाल :
१५ :१५ - १६ :४४
गुलिक काल :
१२ :१७ - १३ :४६
यमगण्ड :
०९ :१९ - १० :४८
 
 
शुभ समय
अभिजित मुहूर्त :
११ :५३ - १२ :४१
अमृत काल :
१६ :५७ - १८ :४२
निवास और शूल
दिशा शूल :
उत्तर में
राहु काल वास :
पश्चिम में
नक्षत्र शूल :
दक्षिण में २४ :४८ से
चन्द्र वास :
पश्चिम में
चन्द्र बल और तारा बल
इन राशियों के लिए उत्तम चन्द्र बल अगले दिन सूर्योदय तक :
मेष, वृषभ, सिंह,
कन्या, धनु, कुम्भ
*कर्क राशि में जन्में लोगो के लिए अष्टम चन्द्र
इन नक्षत्रों के लिए उत्तम तारा बल २४ :४८ तक :
अश्विनी, कृत्तिका, मॄगशिरा,
पुनर्वसु, पुष्य, मघा,
उत्तराफाल्गुनी, चित्रा, विशाखा,
अनुराधा, मूल, उत्तराषाढा,
धनिष्ठा, पूर्व भाद्रपद, उत्तर भाद्रपद
उसके पश्चात -
इन नक्षत्रों के लिए उत्तम तारा बल अगले दिन सूर्योदय तक :
भरणी, रोहिणी, आर्द्रा,
पुष्य, अश्लेशा, पूर्वाफाल्गुनी,
हस्त, स्वाती, अनुराधा,
ज्येष्ठा, पूर्वाषाढा, श्रवण,
शतभिषा, उत्तर भाद्रपद, रेवती