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संतान प्राप्ति में बाधा के योग, कब होता है पेट काट कर संतान का जन्म ?

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इंसान का माता और पिता बनने का सुख विश्व का सबसे बड़ा सुख माना जाता है, और इस सुख को पाने के लिए इंसान किसी भी हद तक जाने के लिए भी तैयार होते है. चाहे संतान को गोद ही क्यूँ न लेना पड़े ? आखिर संतान का सुख विश्व में दूसरी किसी चीज में ढूंढ ने से भी नहीं मिल पाता है. यह सुख किसी को बहोत ही सहजता से प्राप्त होता है, तो किसी को लाख कोशिश करने पर भी जीवन भर निराशा झेलनी पड़ती है. आखिर ज्योतिष में कौन कौन से योग में जातक को संतान का सुख मिलने पर कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है, आइये जानते है इस विषय पर…

कुंडली के पांचवे भाव या स्थान को संतान, शिक्षा, गुरु, प्रेम आदि का स्थान कहा जाता है. कुंडली के पांचवे भाव से जातक के संतान सुख की अधिक जानकारी मिल सकती है. कुंडली के इसी स्थान से और इसी स्थान की राशि के आधार पर संतति का स्वभाव, व्यक्तित्व के विशेष गुण देखे जाते है.

संतान प्राप्ति में कठिनाईयों के योग

पांचवे स्थान में बैठा केतु गर्भ की उत्पत्ति पर रोक लगा देता है. तो पाचवे स्थान में बैठा राहु संतान की उत्पत्ति तो होने देता है, मगर उसे बहोत बार माँ के कोक में ही मार देता है. पंचम स्थान का मालिक अगर छटे भाव में बैठा हो और उस पर शुभ ग्रह की दृष्टी हो तो जातक को संतान दत्तक लेनी पड़ती है. पंचमेश अगर छह, आठ या बारवे भाव में हो, या पंचमेश इन भावोंके अधिपति के साथ इन भावो में बैठा हो तो, जातक को निश्चित रूप से संतान होने में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.

माता पिता की संतान से शत्रुता

पंचम भाव में अगर पाप ग्रह छठे, आठवे या बारवे भाव के मालिक साथ बैठे हो, तो जातक को संतान तो हो जाती है, लेकिन संतान अपने ही माता पिता से बैर रखता है. अपनी ही संतान उसकी तकलीफ का कारन बन जाती है.

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अल्पायु संतान

पंचम स्थान का अधिपति अगर आठवे भाव में बैठा हो और आठवे भाव के अधिपति की भी उसपर दृष्टी हो, पंचम भाव और अष्टम या अष्टमेश से राहु या केतु का कोई संबंध आ जाये तो जातक की संतान अल्पायु होती है. मिस कैरेज होने की संभावना बढ़ जाती है. माँ का पेट काटने से संतान का जन्म होता है, पंचमेश के साथ लग्नेश भी अष्टम भाव में बैठा हो, तो संतान के जन्म के साथ ही माँ की आयु ख़त्म हो जाती है.

तो कठिनाइयों के बाद संतान प्राप्ति

ऊपर दिए योग अगर कुंडली में है, और इसके साथ ही कुंडली में अगर पंचम या पंचम स्थान के अधिपति पर गुरु या और किसी शुभ ग्रह दृष्टी हो, या पंचमेश इनके साथ हो, तो जातक को ऊपर दिए कठिनाइयों का सामना करके, तीसरी, चौथी या पांचवी कोशिश के बाद संतान का सुख मिल जाता है.

संतान प्राप्ति में होगा विलंब

पंचम स्थान या पंचम स्थान के अधिपति के साथ अगर शनि की भी प्रकार का संबंध बना रहे हो, तो जातक को संतान का सुख बड़ी आयु में यानी देरी से प्राप्त होता है.

सिजेरियन या पेट काटने के द्वारा संतान का जन्म

कुंडली में पंचम स्थान में चंद्र और मंगल मेष, वृश्चिक, कर्क, कन्या राशि में हो तो जातक को संतान के जन्म के समय ब्लीडिंग की समस्या का सामना करना पड़ता है. पंचम भाव में बैठा मंगल संतान का जन्म पेट काटने से या सिजेरियन द्वारा करवाता है.

तो गर्भ बन जायेगा रहस्य

केतु से पंचम भाव या इसके अधिपति से संबंध आने पर केतु संतान के बारे में कोई रहस्य बनाकर रखता है, तो राहु से संबंध आने पर संतान के बारे में भ्रमित कर के रखता है.

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