Free online kundli

सोमवार 02 सितंबर, 2024 का पंचांग

श्रावण मास, वर्षा ऋतु, विक्रम संवत, पिंगल 2081

2 Sep 2026
सोमवार

कृष्ण पक्ष, अमावस्या

सूर्योदय
sunrise
5:59:16
सूर्यास्त
sunset
18:41:4
चन्द्रोदय
moonrise
5:4:58
चंद्रास्त
moonset
18:29:38

शुभ अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
11:55 से 12:45
गुलिकाल
13:55:23 से 15:30:37
राहुकाल
07:34:30 से 09:09:43
यमघंट काल
10:44:57 से 12:20:10M

सम्पूर्ण पंचांग

तिथि
अमावस्या - 31:26:13 तक
नक्षत्र
मघा - 24:21:56 तक
योग
शिव - 18:19:17 तक
करण
चतुष्पद - 18:22:9 तक
नक्षत्र देवता
पित्रृगण
नक्षत्र स्वामी
केतु
करण देवता
वृषभ

विशेषता

तिथि विशेष
पूर्णा तिथि - सारांश : कोई महत्वपूर्ण व्यवसाय, निर्माण कार्य , आध्यात्मिक अनुष्ठान, घरेलू कार्य तथा शारीरिक गतिविधियाँ आरम्भ करने के लिए शुभ दिन।
नक्षत्र विशेष
अधोमुख नक्षत्र ,मूल नक्षत्र
करण विशेष
करण विशेषता: अमावस्या (नव-चन्द्रोदय) को पड़ने वाला यह करण तांत्रिक विधियों के माध्यम से शत्रुओं को वश में करने के लिए उपयुक्त है। यह चार पैर वाले पशुओं, विशेष रूप से मवेशियों से संबंधित सभी व्यवसाय में सफलता देता है।
शक संवत :
क्रोधी 1946
विक्रम संवत:
पिंगल 2081
मास अमांत:
श्रावण
मास पूर्णिमांत:
भाद्रपद
सूर्य राशि
सिंह
चंद्र राशि
सिंह
दिशा शूल
पूर्व
चंद्र निवास
पूर्व
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

02 सितंबर 2026 को क्या है ?

02 सितंबर 2026 को बुधवार है. बुधवार के दिन पर बुध ग्रह और भगवान विष्णु का अमल होता है.
    आज का पंचांग

    क्या है पंचांग ?

    पंचांग, (Panchang) पंचांगम एक हिन्दू कैलेंडर (Hindu calender) है. जो खगोलीय घटनाओं पर निर्धारित है. पंचांग में खगोलीय जानकारी को सारणीबद्ध किया जाता है. जिसका उपयोग ज्योतिष या हिन्दू धार्मिक विधान करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है. किसी घटना घटनेपर विशिष्ट नक्षत्र, करण या योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते है. यह जानकारी ज्योतिष अनुमान द्वारा मिल सकती है. पंचांग का उपयोग कर ज्योतिष गणना द्वारा राशिफल दिया जाता है.

    पंचांग (Panchang) शब्द का उपयोग संस्कृत से किया जाता है. पंचांग (Panchang) यानि पांच अंग जो ऊर्जा स्त्रोतोंका प्रतिनिधित्व करते है. यह स्त्रोत दृश्य और अदृश्य दोनों में शामिल है. स्थान या क्षेत्र, समय, तारिक आदि, किसी मुहूर्त के लिए सटीक पंचांग का परिणाम बहुत ही महत्वपूर्ण है. तीथि, योग, वर, नक्षत्र और करण पंचांग की पांच विशेषताएं है. पंचांग की इन पांच विशेषताए जब किसी खास कारन के लिए संतुलन बनाये रखने पर, उसे मुहूर्त कहा जाता है. धार्मिक विधि, विधान करने के लिए, किसी कार्य का प्रयोजन करने के लिए, शुभ मुहूर्त बहोत ही महत्वपूर्ण बन जाता है.

    पंचांग की जरुरत ?

    पंचांग का उपयोग मुख्यत्वे, काल गणना, तिथि वार, व्रत, शुभ मुहूर्त, देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. ज्योतिष गाइड के दैनिक पंचांग में नक्षत्र, योग, करन सहित, शुभ - अशुभ समय, मुहूर्त, चंद्र बल, तारा बल पंचांग में आसानीसे उपलब्ध है.

    पंचांग (Panchang) का निर्धारण, ब्रम्हांड की गति पर निर्भर है. इसलिए जैसे जैसे पृथ्वी भ्रमण करती है, पंचांग समय क्षेत्र के अनुसार बदलता दिखाई देता है. इसलिए एक ही पंचांग अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग हो सकता है. इसलिए सही पंचांग का समय निर्धारण के लिए, क्षेत्र को चुनना अति महत्वपूर्ण है.

    Share with your friends:

    Astrology Tool

    Related Post