Free online kundli

सोमवार 05 फरवरी, 2024 का पंचांग

पौष मास, शिशिर ऋतु, विक्रम संवत, नल 2080

5 Feb 2026
सोमवार

कृष्ण पक्ष, कृष्ण दशमी

सूर्योदय
sunrise
7:7:16
सूर्यास्त
sunset
18:2:27
चन्द्रोदय
moonrise
2:46:33
चंद्रास्त
moonset
13:3:16

शुभ अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
12:13 से 12:55
गुलिकाल
13:56:45 से 15:18:39
राहुकाल
08:29:10 से 09:51:04
यमघंट काल
11:12:58 से 12:34:52M

सम्पूर्ण पंचांग

तिथि
कृष्ण दशमी - 17:26:44 तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा - 31:36:23 तक
योग
व्याघात - 32:50:59 तक
करण
विष्टि - 17:22:44 तक
नक्षत्र देवता
इन्द्र
नक्षत्र स्वामी
बुध
करण देवता
मृत्यु

विशेषता

तिथि विशेष
पूर्णा तिथि - सारांश : किसी भी कार्य, आध्यात्मिक साधनाओं और अन्य पवित्र गतिविधियों को पूर्ण करने के लिए अच्छा है। गृह-प्रवेश, विवाह व नविन व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए शुभ है।
नक्षत्र विशेष
मूल नक्षत्र
करण विशेष
करण विशेषता: इसे भद्रा भी कहा जाता है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के प्रदर्शन के लिए इसे बहुत ही अशुभ करण माना जाता है। इस करण में शुरू किए गए कार्य में थोड़ी सफलता मिल सकती है। विष्टि को भद्रा के नाम से भी जाना जाता है।
शक संवत :
शोभन 1945
विक्रम संवत:
नल 2080
मास अमांत:
पौष
मास पूर्णिमांत:
माघ
सूर्य राशि
मकर
चंद्र राशि
वृश्चिक
दिशा शूल
पूर्व
चंद्र निवास
उत्तर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

05 फरवरी 2026 को क्या है ?

05 फरवरी 2026 को गुरुवार है. गुरुवार के दिन पर गुरु ग्रह, भगवान दत्तात्रेय और सभी प्रकार के गुरुओं का अमल होता है.
    आज का पंचांग

    क्या है पंचांग ?

    पंचांग, (Panchang) पंचांगम एक हिन्दू कैलेंडर (Hindu calender) है. जो खगोलीय घटनाओं पर निर्धारित है. पंचांग में खगोलीय जानकारी को सारणीबद्ध किया जाता है. जिसका उपयोग ज्योतिष या हिन्दू धार्मिक विधान करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है. किसी घटना घटनेपर विशिष्ट नक्षत्र, करण या योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते है. यह जानकारी ज्योतिष अनुमान द्वारा मिल सकती है. पंचांग का उपयोग कर ज्योतिष गणना द्वारा राशिफल दिया जाता है.

    पंचांग (Panchang) शब्द का उपयोग संस्कृत से किया जाता है. पंचांग (Panchang) यानि पांच अंग जो ऊर्जा स्त्रोतोंका प्रतिनिधित्व करते है. यह स्त्रोत दृश्य और अदृश्य दोनों में शामिल है. स्थान या क्षेत्र, समय, तारिक आदि, किसी मुहूर्त के लिए सटीक पंचांग का परिणाम बहुत ही महत्वपूर्ण है. तीथि, योग, वर, नक्षत्र और करण पंचांग की पांच विशेषताएं है. पंचांग की इन पांच विशेषताए जब किसी खास कारन के लिए संतुलन बनाये रखने पर, उसे मुहूर्त कहा जाता है. धार्मिक विधि, विधान करने के लिए, किसी कार्य का प्रयोजन करने के लिए, शुभ मुहूर्त बहोत ही महत्वपूर्ण बन जाता है.

    पंचांग की जरुरत ?

    पंचांग का उपयोग मुख्यत्वे, काल गणना, तिथि वार, व्रत, शुभ मुहूर्त, देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. ज्योतिष गाइड के दैनिक पंचांग में नक्षत्र, योग, करन सहित, शुभ - अशुभ समय, मुहूर्त, चंद्र बल, तारा बल पंचांग में आसानीसे उपलब्ध है.

    पंचांग (Panchang) का निर्धारण, ब्रम्हांड की गति पर निर्भर है. इसलिए जैसे जैसे पृथ्वी भ्रमण करती है, पंचांग समय क्षेत्र के अनुसार बदलता दिखाई देता है. इसलिए एक ही पंचांग अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग हो सकता है. इसलिए सही पंचांग का समय निर्धारण के लिए, क्षेत्र को चुनना अति महत्वपूर्ण है.

    Share with your friends:

    Astrology Tool

    Related Post