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मंगलवार 10 सितंबर, 2024 का पंचांग

भाद्रपद मास, वर्षा ऋतु, विक्रम संवत, पिंगल 2081

10 Sep 2026
मंगलवार

शुक्ल पक्ष, शुक्ल सप्तमी

सूर्योदय
sunrise
6:3:15
सूर्यास्त
sunset
18:31:38
चन्द्रोदय
moonrise
12:21:5
चंद्रास्त
moonset
22:34:2

शुभ अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
11:53 से 12:41
गुलिकाल
12:17:27 से 13:51:00
राहुकाल
15:24:33 से 16:58:06
यमघंट काल
09:10:21 से 10:43:54M

सम्पूर्ण पंचांग

तिथि
शुक्ल सप्तमी - 23:13:41 तक
नक्षत्र
अनुराधा - 20:4:51 तक
योग
विष्कुम्भ - 24:31:10 तक
करण
वणिज - 23:7:42 तक
नक्षत्र देवता
मित्र
नक्षत्र स्वामी
शनि
करण देवता
मणिभद्र

विशेषता

तिथि विशेष
भद्रा तिथि - सारांश : कोई भी नया कार्य, चर्चा, यात्रा की शुरुआत और शारीरिक व्यायाम आरम्भ करने के लिए अनुकूल।
नक्षत्र विशेष
-
करण विशेष
करण विशेषता: यह विक्रय कारोबार के लिए अनुकूल है तथा विक्रेताओं को अच्छा लाभ मिल सकता है जबकि खरीदार इस करण में हानि उठा सकते हैं।
शक संवत :
क्रोधी 1946
विक्रम संवत:
पिंगल 2081
मास अमांत:
भाद्रपद
मास पूर्णिमांत:
भाद्रपद
सूर्य राशि
सिंह
चंद्र राशि
वृश्चिक
दिशा शूल
उत्तर
चंद्र निवास
उत्तर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

10 सितंबर 2026 को क्या है ?

10 सितंबर 2026 को गुरुवार है. गुरुवार के दिन पर गुरु ग्रह, भगवान दत्तात्रेय और सभी प्रकार के गुरुओं का अमल होता है.
    आज का पंचांग

    क्या है पंचांग ?

    पंचांग, (Panchang) पंचांगम एक हिन्दू कैलेंडर (Hindu calender) है. जो खगोलीय घटनाओं पर निर्धारित है. पंचांग में खगोलीय जानकारी को सारणीबद्ध किया जाता है. जिसका उपयोग ज्योतिष या हिन्दू धार्मिक विधान करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है. किसी घटना घटनेपर विशिष्ट नक्षत्र, करण या योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते है. यह जानकारी ज्योतिष अनुमान द्वारा मिल सकती है. पंचांग का उपयोग कर ज्योतिष गणना द्वारा राशिफल दिया जाता है.

    पंचांग (Panchang) शब्द का उपयोग संस्कृत से किया जाता है. पंचांग (Panchang) यानि पांच अंग जो ऊर्जा स्त्रोतोंका प्रतिनिधित्व करते है. यह स्त्रोत दृश्य और अदृश्य दोनों में शामिल है. स्थान या क्षेत्र, समय, तारिक आदि, किसी मुहूर्त के लिए सटीक पंचांग का परिणाम बहुत ही महत्वपूर्ण है. तीथि, योग, वर, नक्षत्र और करण पंचांग की पांच विशेषताएं है. पंचांग की इन पांच विशेषताए जब किसी खास कारन के लिए संतुलन बनाये रखने पर, उसे मुहूर्त कहा जाता है. धार्मिक विधि, विधान करने के लिए, किसी कार्य का प्रयोजन करने के लिए, शुभ मुहूर्त बहोत ही महत्वपूर्ण बन जाता है.

    पंचांग की जरुरत ?

    पंचांग का उपयोग मुख्यत्वे, काल गणना, तिथि वार, व्रत, शुभ मुहूर्त, देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. ज्योतिष गाइड के दैनिक पंचांग में नक्षत्र, योग, करन सहित, शुभ - अशुभ समय, मुहूर्त, चंद्र बल, तारा बल पंचांग में आसानीसे उपलब्ध है.

    पंचांग (Panchang) का निर्धारण, ब्रम्हांड की गति पर निर्भर है. इसलिए जैसे जैसे पृथ्वी भ्रमण करती है, पंचांग समय क्षेत्र के अनुसार बदलता दिखाई देता है. इसलिए एक ही पंचांग अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग हो सकता है. इसलिए सही पंचांग का समय निर्धारण के लिए, क्षेत्र को चुनना अति महत्वपूर्ण है.

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