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रविवार 12 अप्रैल, 2026 का पंचांग

चैत्र मास, वसंत ऋतु, विक्रम संवत, सिद्धार्थ 2083

12 Apr 2026
रविवार

कृष्ण पक्ष, कृष्ण दशमी

सूर्योदय
sunrise
5:58:37
सूर्यास्त
sunset
18:45:1
चन्द्रोदय
moonrise
2:43:1
चंद्रास्त
moonset
13:36:46

शुभ अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
11:56 से 12:46
गुलिकाल
15:33:25 से 17:09:13
राहुकाल
17:09:13 से 18:45:01
यमघंट काल
12:21:49 से 13:57:37M

सम्पूर्ण पंचांग

तिथि
कृष्ण दशमी - 25:18:34 तक
नक्षत्र
श्रावण - 15:15:2 तक
योग
साध्य - 18:16:37 तक
करण
वणिज - 12:57:52 तक
नक्षत्र देवता
हरि
नक्षत्र स्वामी
चन्द्र
करण देवता
मणिभद्र

विशेषता

तिथि विशेष
पूर्णा तिथि - सारांश : किसी भी कार्य, आध्यात्मिक साधनाओं और अन्य पवित्र गतिविधियों को पूर्ण करने के लिए अच्छा है। गृह-प्रवेश, विवाह व नविन व्यवसाय प्रारम्भ करने के लिए शुभ है।
नक्षत्र विशेष
उधर्वमुख नक्षत्र
करण विशेष
करण विशेषता: यह विक्रय कारोबार के लिए अनुकूल है तथा विक्रेताओं को अच्छा लाभ मिल सकता है जबकि खरीदार इस करण में हानि उठा सकते हैं।
शक संवत :
प्रभाउ 1948
विक्रम संवत:
सिद्धार्थ 2083
मास अमांत:
चैत्र
मास पूर्णिमांत:
वैशाख
सूर्य राशि
मीन
चंद्र राशि
मकर
दिशा शूल
पश्चिम
चंद्र निवास
दक्षिण
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

12 अप्रैल 2026 को क्या है ?

12 अप्रैल 2026 को रविवार है. रविवार के दिन पर सूर्यदेव का अमल होता है.
    आज का पंचांग

    क्या है पंचांग ?

    पंचांग, (Panchang) पंचांगम एक हिन्दू कैलेंडर (Hindu calender) है. जो खगोलीय घटनाओं पर निर्धारित है. पंचांग में खगोलीय जानकारी को सारणीबद्ध किया जाता है. जिसका उपयोग ज्योतिष या हिन्दू धार्मिक विधान करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है. किसी घटना घटनेपर विशिष्ट नक्षत्र, करण या योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते है. यह जानकारी ज्योतिष अनुमान द्वारा मिल सकती है. पंचांग का उपयोग कर ज्योतिष गणना द्वारा राशिफल दिया जाता है.

    पंचांग (Panchang) शब्द का उपयोग संस्कृत से किया जाता है. पंचांग (Panchang) यानि पांच अंग जो ऊर्जा स्त्रोतोंका प्रतिनिधित्व करते है. यह स्त्रोत दृश्य और अदृश्य दोनों में शामिल है. स्थान या क्षेत्र, समय, तारिक आदि, किसी मुहूर्त के लिए सटीक पंचांग का परिणाम बहुत ही महत्वपूर्ण है. तीथि, योग, वर, नक्षत्र और करण पंचांग की पांच विशेषताएं है. पंचांग की इन पांच विशेषताए जब किसी खास कारन के लिए संतुलन बनाये रखने पर, उसे मुहूर्त कहा जाता है. धार्मिक विधि, विधान करने के लिए, किसी कार्य का प्रयोजन करने के लिए, शुभ मुहूर्त बहोत ही महत्वपूर्ण बन जाता है.

    पंचांग की जरुरत ?

    पंचांग का उपयोग मुख्यत्वे, काल गणना, तिथि वार, व्रत, शुभ मुहूर्त, देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. ज्योतिष गाइड के दैनिक पंचांग में नक्षत्र, योग, करन सहित, शुभ - अशुभ समय, मुहूर्त, चंद्र बल, तारा बल पंचांग में आसानीसे उपलब्ध है.

    पंचांग (Panchang) का निर्धारण, ब्रम्हांड की गति पर निर्भर है. इसलिए जैसे जैसे पृथ्वी भ्रमण करती है, पंचांग समय क्षेत्र के अनुसार बदलता दिखाई देता है. इसलिए एक ही पंचांग अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग हो सकता है. इसलिए सही पंचांग का समय निर्धारण के लिए, क्षेत्र को चुनना अति महत्वपूर्ण है.

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