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शनिवार 24 अक्टूबर, 2026 का पंचांग

अश्विन मास, शरद ऋतु, विक्रम संवत, सिद्धार्थ 2083

24 Oct 2026
शनिवार

शुक्ल पक्ष, शुक्ल त्रयोदशी

सूर्योदय
sunrise
6:27:18
सूर्यास्त
sunset
17:42:22
चन्द्रोदय
moonrise
16:21:47
चंद्रास्त
moonset
4:19:30

शुभ अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
11:42 से 12:26
गुलिकाल
06:27:18 से 07:51:41
राहुकाल
09:16:04 से 10:40:27
यमघंट काल
13:29:13 से 14:53:36M

सम्पूर्ण पंचांग

तिथि
शुक्ल त्रयोदशी - 13:38:18 तक
नक्षत्र
उत्तर भाद्रपद - 20:33:15 तक
योग
व्याघात - 20:2:16 तक
करण
कौलव - 2:12:7 तक
नक्षत्र देवता
अभिर्भुध्यान
नक्षत्र स्वामी
शनि
करण देवता
चंद्र

विशेषता

तिथि विशेष
जया तिथि - सारांश : महत्वपूर्ण व्यवसाय का आरम्भ, नए वस्त्र पहनना, वचनों की पूर्ति तथा कामुक सुख के लिए शुभ दिन।
नक्षत्र विशेष
उधर्वमुख नक्षत्र ,पंचक नक्षत्र
करण विशेष
करण विशेषता: यह मैत्री के लिए तथा स्थायी व स्थिर प्रकृति के सभी कार्यों के लिए अनुकूल है।
शक संवत :
प्रभाउ 1948
विक्रम संवत:
सिद्धार्थ 2083
मास अमांत:
अश्विन
मास पूर्णिमांत:
अश्विन
सूर्य राशि
तुला
चंद्र राशि
मीन
दिशा शूल
पूर्व
चंद्र निवास
उत्तर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

24 अक्टूबर 2026 को क्या है ?

24 अक्टूबर 2026 को शनिवार है. शनिवार के दिन पर भगवान शनि देव का अमल होता है.
    आज का पंचांग

    क्या है पंचांग ?

    पंचांग, (Panchang) पंचांगम एक हिन्दू कैलेंडर (Hindu calender) है. जो खगोलीय घटनाओं पर निर्धारित है. पंचांग में खगोलीय जानकारी को सारणीबद्ध किया जाता है. जिसका उपयोग ज्योतिष या हिन्दू धार्मिक विधान करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है. किसी घटना घटनेपर विशिष्ट नक्षत्र, करण या योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते है. यह जानकारी ज्योतिष अनुमान द्वारा मिल सकती है. पंचांग का उपयोग कर ज्योतिष गणना द्वारा राशिफल दिया जाता है.

    पंचांग (Panchang) शब्द का उपयोग संस्कृत से किया जाता है. पंचांग (Panchang) यानि पांच अंग जो ऊर्जा स्त्रोतोंका प्रतिनिधित्व करते है. यह स्त्रोत दृश्य और अदृश्य दोनों में शामिल है. स्थान या क्षेत्र, समय, तारिक आदि, किसी मुहूर्त के लिए सटीक पंचांग का परिणाम बहुत ही महत्वपूर्ण है. तीथि, योग, वर, नक्षत्र और करण पंचांग की पांच विशेषताएं है. पंचांग की इन पांच विशेषताए जब किसी खास कारन के लिए संतुलन बनाये रखने पर, उसे मुहूर्त कहा जाता है. धार्मिक विधि, विधान करने के लिए, किसी कार्य का प्रयोजन करने के लिए, शुभ मुहूर्त बहोत ही महत्वपूर्ण बन जाता है.

    पंचांग की जरुरत ?

    पंचांग का उपयोग मुख्यत्वे, काल गणना, तिथि वार, व्रत, शुभ मुहूर्त, देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. ज्योतिष गाइड के दैनिक पंचांग में नक्षत्र, योग, करन सहित, शुभ - अशुभ समय, मुहूर्त, चंद्र बल, तारा बल पंचांग में आसानीसे उपलब्ध है.

    पंचांग (Panchang) का निर्धारण, ब्रम्हांड की गति पर निर्भर है. इसलिए जैसे जैसे पृथ्वी भ्रमण करती है, पंचांग समय क्षेत्र के अनुसार बदलता दिखाई देता है. इसलिए एक ही पंचांग अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग हो सकता है. इसलिए सही पंचांग का समय निर्धारण के लिए, क्षेत्र को चुनना अति महत्वपूर्ण है.

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