Home ग्रह परिचय ग्रह परिचय : ज्योतिष में नौ ग्रहों में सूर्य ग्रह का महत्व

ग्रह परिचय : ज्योतिष में नौ ग्रहों में सूर्य ग्रह का महत्व

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सूर्य को नौ ग्रहो में प्रथम स्थान एवं ग्रहों मे सूर्य को राजा भी कहा जाता है, वो पुरे ग्रह मंडल में प्रमुख है. संसार के सारे ग्रह या तारों को सूर्य से ऊर्जा एवं आत्मबल की प्राप्ति होती है. इसीलिए सूर्य को आत्मबल का कारक माना जाता है. जन्म के समय आकाश में सूर्य का स्थान जातक पर अपना प्रभाव निश्चित करता है.

सूर्य नारंगी रंग का शुष्क, गर्म, आग्नेय और पौरुष प्रवृत्ति वाला ग्रह है.

सूर्य का कारकत्व :

वैदिक ज्योतिष में सूर्य आत्मबल, साहस, पराक्रम, तेजस्वी, समूह का प्रमुख, राजनेता, सभी प्रकार के राजा, आत्मसन्मान, शासन या सरकारी व्यवस्था, मानसन्मान, मनुष्य का ह्रदय, तांबा और सोना, नारंगी रंग, पूर्व दिशा आदि का कारक माना जाता है.

सूर्य ग्रह का फल :

ज्योतिष में सूर्य की स्वराशि सिंह है, तथा सूर्य मेष राशि में उच्च के और तुला राशि में वे नीच के हो जाते है. सूर्य अपने मित्र ग्रहोंकी राशि में सकारत्मक फल देते है.

बलि यानि उच्च या मित्र ग्रहों की राशि में स्थित सूर्य के कारन जातक का जीवन की और देखने का नजरिया या सोच सकारात्मक होती है. इनका जीवन आशावादी बना रहता है. दूसरों के प्रति इनका भाव दयालु होता है. इन जातक के पास भरपूर मात्रा में आत्मविश्वास होता है. यह लोग हमेश समूह का नेतृत्व करने मे सक्षम होते है. सूर्य के प्रभाव वाले व्यक्ति दूसरों को बहुत जल्दी प्रभावित करते है.

कुंडली के लग्न भाव में अपने या मित्र ग्रहोंकी राशि में सूर्य विराजित हो तो ऊपर दिए गए गुण या विशेषताएं जातक में भरपूर मात्रा में पायी जाती है. ऐसे जातक का कद सामन्य होता है, रंग गोरा, चेहरा गोल, आंखे भूरी, और बाल रूखे या कभी कभी घुंघराले होते है. इनका कद भले ही छोटा क्यों न हो शरीर मजबूत होता है.

पीड़ित सूर्य का फल :

कुंडली में पीड़ित सूर्य अगर अष्टम भाव, बारवे भाव, शनि, राहु से दृष्ट या युक्त हो, शत्रु या नीच राशि में हो, तो जातक में आत्मविश्वास की कमी होती है, आत्मविश्वास की कमी के कारन इनके बड़े बड़े कार्य अधूरे रहते है, या यह जातक अपने कार्य को अंजाम नहीं दे पाते है. सूर्य को जीवन और आरोग्य का कारक माना जाता है, ऐसे में सूर्य पाप ग्रह के साथ युति में बैठ जाए तो जातक आत्महत्या, अल्पायु या बीमारियों से घिरा हुआ होता है. पीड़ित सूर्य महत्वाकांक्षी, आत्म केंद्रित, ईर्ष्यालु, क्रोधी बनाता है.

कुंडली में पीड़ित सूर्य अगर लग्न भाव में विराजित हो, तो जातक अहंकारी, उच्च या नीच को माननेवाला, अपनों से निचले वर्ग पर अन्याय करने वाला, अपने अति आत्मविश्वास के कारन पराजित होने वाला, अपमानित होने वाला, निर्दयी राजा के समान होता है.

पीड़ित सूर्य का प्रभाव कम करने के लिए सूर्य का मन्त्र जाप करे तो कम समय के लिए क्यूँ न हो, लेकिन इसका लाभ अवश्य मिलता है.

सूर्य के अधिकार क्षेत्र :

सूर्य आरोग्य या जीवन का कारक माना जाता है, इसलिए दवाई, मेडिकल, डॉक्टर्स इनका भी सूर्य कारक माना जाता है, सूर्य राजनेता, सभी प्रकार के राजाओं का कारक माना जाता है. सरकारी व्यवस्था या नौकरी सूर्य से ही देखि जाती है, समूह का नेतृत्व करने वाले सूर्य लोग सूर्य से ही देखे जाते है. जीवन में सभी प्रकार के मान सन्मान सूर्य से ही देखे जाते है.

सरकारी देनदारी, स्वर्ण, रिज़र्व बैंक, शेयर बाज़ार आदि पर सूर्य का प्रभाव होता है.

सूर्य के रत्न : सूर्य का रत्न माणिक्य है.
सूर्य के रंग : सूर्य का रंग नारंगी है.
सूर्य के वार : सूर्य का वार इतवार है.

सूर्य ग्रह का वैदिक मंत्र :
ॐ आ कृष्णेन रजसा वर्तमानो निवेशयन्नमृतं मर्त्यं च।
हिरण्ययेन सविता रथेना देवो याति भुवनानि पश्यन्।।

सूर्य ग्रह का तांत्रिक मंत्र :
ॐ घृणि सूर्याय नम :

सूर्य ग्रह का बीज मंत्र :
ॐ ह्रां ह्रीं ह्रौं सः सूर्याय नमः

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