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सोमवार 18 दिसंबर, 2023 का पंचांग

मृगशिरा मास, हेमंत ऋतु, विक्रम संवत, नल 2080

18 Dec 2026
सोमवार

शुक्ल पक्ष, शुक्ल षष्ठी

सूर्योदय
sunrise
7:7:48
सूर्यास्त
sunset
17:26:25
चन्द्रोदय
moonrise
11:40:35
चंद्रास्त
moonset
23:12:13

शुभ अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
11:57 से 12:37
गुलिकाल
13:34:27 से 14:51:46
राहुकाल
08:25:08 से 09:42:28
यमघंट काल
10:59:47 से 12:17:07M

सम्पूर्ण पंचांग

तिथि
शुक्ल षष्ठी - 15:15:8 तक
नक्षत्र
धनिष्ठा - 2:55:31 तक
योग
वज्र - 21:31:17 तक
करण
कौलव - 4:23:13 तक
नक्षत्र देवता
अस्थावासु
नक्षत्र स्वामी
मंगल
करण देवता
चंद्र

विशेषता

तिथि विशेष
नंदा तिथि - सारांश : निर्माण कार्य तथा घर व अचल संपत्ति से सम्बंधित गतिविधियों के लिए अनुकूल।
नक्षत्र विशेष
उधर्वमुख नक्षत्र ,पंचक नक्षत्र
करण विशेष
करण विशेषता: यह मैत्री के लिए तथा स्थायी व स्थिर प्रकृति के सभी कार्यों के लिए अनुकूल है।
शक संवत :
शोभन 1945
विक्रम संवत:
नल 2080
मास अमांत:
मृगशिरा
मास पूर्णिमांत:
मृगशिरा
सूर्य राशि
धनु
चंद्र राशि
कुम्भ
दिशा शूल
पूर्व
चंद्र निवास
पश्चिम
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

18 दिसंबर 2026 को क्या है ?

18 दिसंबर 2026 को शुक्रवार है. शुक्रवार के दिन पर शुक्र ग्रह और माता लक्ष्मी का अमल होता है.
    आज का पंचांग

    क्या है पंचांग ?

    पंचांग, (Panchang) पंचांगम एक हिन्दू कैलेंडर (Hindu calender) है. जो खगोलीय घटनाओं पर निर्धारित है. पंचांग में खगोलीय जानकारी को सारणीबद्ध किया जाता है. जिसका उपयोग ज्योतिष या हिन्दू धार्मिक विधान करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है. किसी घटना घटनेपर विशिष्ट नक्षत्र, करण या योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते है. यह जानकारी ज्योतिष अनुमान द्वारा मिल सकती है. पंचांग का उपयोग कर ज्योतिष गणना द्वारा राशिफल दिया जाता है.

    पंचांग (Panchang) शब्द का उपयोग संस्कृत से किया जाता है. पंचांग (Panchang) यानि पांच अंग जो ऊर्जा स्त्रोतोंका प्रतिनिधित्व करते है. यह स्त्रोत दृश्य और अदृश्य दोनों में शामिल है. स्थान या क्षेत्र, समय, तारिक आदि, किसी मुहूर्त के लिए सटीक पंचांग का परिणाम बहुत ही महत्वपूर्ण है. तीथि, योग, वर, नक्षत्र और करण पंचांग की पांच विशेषताएं है. पंचांग की इन पांच विशेषताए जब किसी खास कारन के लिए संतुलन बनाये रखने पर, उसे मुहूर्त कहा जाता है. धार्मिक विधि, विधान करने के लिए, किसी कार्य का प्रयोजन करने के लिए, शुभ मुहूर्त बहोत ही महत्वपूर्ण बन जाता है.

    पंचांग की जरुरत ?

    पंचांग का उपयोग मुख्यत्वे, काल गणना, तिथि वार, व्रत, शुभ मुहूर्त, देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. ज्योतिष गाइड के दैनिक पंचांग में नक्षत्र, योग, करन सहित, शुभ - अशुभ समय, मुहूर्त, चंद्र बल, तारा बल पंचांग में आसानीसे उपलब्ध है.

    पंचांग (Panchang) का निर्धारण, ब्रम्हांड की गति पर निर्भर है. इसलिए जैसे जैसे पृथ्वी भ्रमण करती है, पंचांग समय क्षेत्र के अनुसार बदलता दिखाई देता है. इसलिए एक ही पंचांग अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग हो सकता है. इसलिए सही पंचांग का समय निर्धारण के लिए, क्षेत्र को चुनना अति महत्वपूर्ण है.

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