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सोमवार 22 जून, 2026 का पंचांग

ज्येष्ठ मास, ग्रीष्म ऋतु, विक्रम संवत, सिद्धार्थ 2083

22 Jun 2026
सोमवार

शुक्ल पक्ष, शुक्ल अष्टमी

सूर्योदय
sunrise
5:23:9
सूर्यास्त
sunset
19:22:24
चन्द्रोदय
moonrise
12:45:31
चंद्रास्त
moonset
0:8:41

शुभ अशुभ समय

शुभ मुहूर्त
11:55 से 12:49
गुलिकाल
14:07:41 से 15:52:36
राहुकाल
07:08:03 से 08:52:58
यमघंट काल
10:37:52 से 12:22:46M

सम्पूर्ण पंचांग

तिथि
शुक्ल अष्टमी - 15:41:8 तक
नक्षत्र
उत्तर फाल्गुनी - 10:24:25 तक
योग
व्यतिपात - 10:31:47 तक
करण
विष्टि - 3:26:16 तक
नक्षत्र देवता
आर्यमान
नक्षत्र स्वामी
सूर्य
करण देवता
मृत्यु

विशेषता

तिथि विशेष
नंदा तिथि - सारांश : वास्तुकला, चर्चा और नृत्य गतिविधियों के लिए अच्छा है। व्यापार प्रारम्भ करने के लिए शुभ।
नक्षत्र विशेष
उधर्वमुख नक्षत्र
करण विशेष
करण विशेषता: इसे भद्रा भी कहा जाता है। किसी भी महत्वपूर्ण कार्य के प्रदर्शन के लिए इसे बहुत ही अशुभ करण माना जाता है। इस करण में शुरू किए गए कार्य में थोड़ी सफलता मिल सकती है। विष्टि को भद्रा के नाम से भी जाना जाता है।
शक संवत :
प्रभाउ 1948
विक्रम संवत:
सिद्धार्थ 2083
मास अमांत:
ज्येष्ठ
मास पूर्णिमांत:
ज्येष्ठ
सूर्य राशि
मिथुन
चंद्र राशि
कन्या
दिशा शूल
पूर्व
चंद्र निवास
दक्षिण
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

22 जून 2026 को क्या है ?

22 जून 2026 को सोमवार है. सोमवार के दिन पर चन्द्रमा और, भगवान महादेव का अमल होता है.
    आज का पंचांग

    क्या है पंचांग ?

    पंचांग, (Panchang) पंचांगम एक हिन्दू कैलेंडर (Hindu calender) है. जो खगोलीय घटनाओं पर निर्धारित है. पंचांग में खगोलीय जानकारी को सारणीबद्ध किया जाता है. जिसका उपयोग ज्योतिष या हिन्दू धार्मिक विधान करने के लिए अति महत्वपूर्ण हो जाता है. किसी घटना घटनेपर विशिष्ट नक्षत्र, करण या योग महत्वपूर्ण भूमिका निभाते दिखाई देते है. यह जानकारी ज्योतिष अनुमान द्वारा मिल सकती है. पंचांग का उपयोग कर ज्योतिष गणना द्वारा राशिफल दिया जाता है.

    पंचांग (Panchang) शब्द का उपयोग संस्कृत से किया जाता है. पंचांग (Panchang) यानि पांच अंग जो ऊर्जा स्त्रोतोंका प्रतिनिधित्व करते है. यह स्त्रोत दृश्य और अदृश्य दोनों में शामिल है. स्थान या क्षेत्र, समय, तारिक आदि, किसी मुहूर्त के लिए सटीक पंचांग का परिणाम बहुत ही महत्वपूर्ण है. तीथि, योग, वर, नक्षत्र और करण पंचांग की पांच विशेषताएं है. पंचांग की इन पांच विशेषताए जब किसी खास कारन के लिए संतुलन बनाये रखने पर, उसे मुहूर्त कहा जाता है. धार्मिक विधि, विधान करने के लिए, किसी कार्य का प्रयोजन करने के लिए, शुभ मुहूर्त बहोत ही महत्वपूर्ण बन जाता है.

    पंचांग की जरुरत ?

    पंचांग का उपयोग मुख्यत्वे, काल गणना, तिथि वार, व्रत, शुभ मुहूर्त, देखने के लिए पंचांग का उपयोग किया जाता है. ज्योतिष गाइड के दैनिक पंचांग में नक्षत्र, योग, करन सहित, शुभ - अशुभ समय, मुहूर्त, चंद्र बल, तारा बल पंचांग में आसानीसे उपलब्ध है.

    पंचांग (Panchang) का निर्धारण, ब्रम्हांड की गति पर निर्भर है. इसलिए जैसे जैसे पृथ्वी भ्रमण करती है, पंचांग समय क्षेत्र के अनुसार बदलता दिखाई देता है. इसलिए एक ही पंचांग अलग अलग क्षेत्रों के लिए अलग अलग हो सकता है. इसलिए सही पंचांग का समय निर्धारण के लिए, क्षेत्र को चुनना अति महत्वपूर्ण है.

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