Home ग्रह परिचय राहु और केतु का वो सच जो आपने शायद कभी नही सुना...

राहु और केतु का वो सच जो आपने शायद कभी नही सुना होगा, राहु और केतु, संसार का संतुलन

2005
6
rahu ketu

राहु और केतु इन दोनों आकाश में विरुद्ध दिशा के दो अदृश्य बिंदु कहे जाते है. लेकिन ज्योतिष में इन दोनों बिंदुओं को ग्रहों का दर्जा दिया गया है. राहु और केतु को मिलाकर ज्योतिष में नौ ग्रह माने जाते है. चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और रवि जैसे ग्रह संसार का एक पहलू दिखाते है, जो आप और हम रोज के जीवन में देख पाते है. तथा राहु और केतु संसार के उस पहलू को दर्शाते है, जो मृत्यु पश्चात् शायद ही कोई देख पाता है.

रहस्यमई केतु की सच्चाई

केतु संसार का आध्यात्मिक रूप से वो बिंदु है, जो हर कदम व्यक्ति को मुक्ति की तरफ ले जाता है, केतु हर विषय को रहस्यमई बनाये रखने में माहिर है, तथा यही जीवन का ज्ञान है, जो मृत्यु पश्चात ही उसका ज्ञान होता है. केतु वो बिंदु है जो अपने आप को रहस्यमई बनाये रखता है, इसके बावजूद किसीने अपने ज्ञान की सिमा लांघकर इस रहस्य का ज्ञान प्राप्त किया तो वो इंसान उस बिंदु तक पहुँच पाता है, जहा संसार भी ख़त्म होता है, और आत्मा को मुक्ति मिल जाती है, और आखिर में जातक के लिए केतु एक आभासी रूप में ही ख़तम हो जाता है. इसी का अर्थ, केतु नया उत्पन्न होने नहीं देता है, केतु जातक को आध्यात्मिक ज्ञान में रूचि देता है. सारे धार्मिक विधान, ज्ञान की बाते, रहस्यमयी ज्ञान या खोज, साधु, देवालय, धार्मिक रीती रिवाज, धार्मिक कानून, संत इन पर केतु का प्रभाव होता है. बिना केतु के जातक को मुक्ति या या मुक्ति के करीब ले जानेवाला ज्ञान कभी प्राप्त नहीं हो सकता.

राहु की वो सच्चाई

केतु और राहु एक दूसरे से १८० कोण में होते है. केतु आध्यात्मिक ज्ञान को बढ़ावा देता है, राहु का स्वभाव केतु से एकदम भिन्न है. राहु संसार के भौतिक सुखोंका, वो बिंदु है, जो व्यक्ति को मुक्ति से दूर ले जाता है. राहु धार्मिक रीती – रिवाज, नियमों का पालन करने वाला ग्रह बिलकुल नहीं है. राहु पाप पुण्य को बिलकुल नहीं मानता. बड़े गुन्हेगार, झूठे वचनो में फ़साने वाले इंसान, इनपर राहु का प्राबल्य होता है. भ्रम की निर्मिति स्वयं राहु ही करवाता है. जुआ, मटका, दारू के अड्डे, कसाई खाने इनपर राहु का प्राबल्य होता है. किसी भी व्यसन की अधीनता राहु के अधीन होती है. राहु असल में भौतिक जीवन का आनंद उपभोगता है, वो भी किसी भी सामाजिक बंधन में रहे बिना, राहु प्रभावित जातक सिर्फ आनंद नहीं लेता तो किसी का हक़ छीनकर, जबरदस्ती धमकाकर, दुसरों पर अन्याय कर के जीवन का आनंद उपभोगता है. यही राहु की निति होती है.

राहु अपना स्वभाव कभी नहीं छोड़ता

यदि कुंडली में राहु अच्छी स्थिति में है, तो ऊपर दिए कर्मो से जातक को लाभ मिलता है, जैसे राहु के अच्छे प्रभाव से जातक स्वयं की दारू की दुकान होने पर भी वो व्यवसनाधीन नहीं हो पाता है. राहु के अच्छे प्रभाव के कारन दूसरोंको कर्ज देने से लाभ मिलता है. भ्रमित करनेवाले कामों में राहु सफलता दिलाता है. लेकिन कुंडली में राहु कितना भी अच्छा क्यों न हो, अगर जातक पर राहु का प्रभाव हो, चाहे वो अच्छा हो या बुरा, वो जातक को कभी धर्म ज्ञान, मुक्ति ज्ञान जैसे विषयों मे रूचि नहीं लेने देता. यहाँ तक की, वो जातक को किसी भी नियम में बंधने की अनुमति नहीं देता. राहु अपने नैसर्गिक स्वभाव को हमेशा बरकार रखता है.

राहु – केतु संसार के संतुलन को बनाये रक्खने वाले दो बिंदू

राहु और केतु के प्रभाव को देखा जाए, तो यही दो बिंदु या ज्योतिष के ग्रह है, जो संसार को चलाते है. एक (केतु) आध्यात्मिक ज्ञान की बढ़ोतरी कर मुक्ति की तरफ ले जाता है, तो दूसरा (राहु) मुक्ति से और दूर भौतिक जीवन का आनंद लेने के लिए प्रोत्साहित करता है. राहु और केतु के कारन ही संसार का संतुलन अभीतक बना हुआ है, इसी कारण संसार पर ना पाप हावी हो पाता है, और नाही पुण्य संसार को जित पाता है, क्यूंकि जब हर किसी को यह ज्ञान हो जायेगा तो, संसार का कोई मोल नहीं रहेगा.

अगर आपको हमारे ज्योतिष विषय पर लेख अच्छे लगते है तो, कृपया फेसबुक पेज पर हमें लाइक करे, यूट्यूब पर सब्स्क्राइब करे, ताकि आने वाले नए ज्योतिष के लेख और व्हिडिओ आप मिस नहीं कर पाएंगे. अगर आपके मन में कोई प्रश्न हो, तो कमेंट द्वारा अवश्य पूछे. धन्यवाद.

6 COMMENTS

  1. कन्या लग्न की कुंडली में 4th हाउस में राहु है …गुरु के घर में तो क्या वह मकान का सुख देगा। ……ओर10th हाउस में शनि हैं केतु के साथ 3 no.का …….इनके प्रभाव बताये

    • अगर शनि की दृष्टि चतुर्थ भाव पर हो, और राहु स्वयं चतुर्थ भाव में हो, तो सुख में कोई ना कोई कमी तो अवश्य आएगी ।

  2. 5th house me Rahu mithun rasi ka hai to kamai sidhe raste se aayegi k ulte raste se

    • पांचवा भाव कमाई का नहीं है, पांचवा भाव शिक्षा, संतान सुख का है, लाभ यानि ग्यारवे भाव में कोई भी ग्रह कमाई के मामले में अच्छे फल देता है, केतु अगर ग्यारवे भाव में हो, तो धार्मिक कार्य, गुप्त कार्यों से धनार्जन हो सकता है.

  3. Makar lagna main 11th house shani ka kya prabhav hai and guru ki mahadasha ka fhal

    • ग्यारहवें भाव में लगभग सभी ग्रह अच्छे ही फल देते है. लेकिन शनि कौनसे स्थान का मालिक है, यह उसपर निर्भर करेगा, की वो क्या फल देगा, किसी ग्रह की महादशा का फल देखने के लिए, वो ग्रह कुंडली में कहा और किस अवस्था में बैठा है, यह जानना जरुरी होता है.

Comments are closed.