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वॉलपेपर | April 27, 2021, 10:15 am | Jyotish Guide
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भगवान गणेश को बुद्धि की देवता माना जाता है. Ganesh Images | lord Ganesha images | Ganesh Photo खास उनके भक्तोंके लिए दिए जा रहे है. भगवान गणेश का मोहक रूप हमेशा मन को उत्साहित और आनंद देता है. इसलिए गणेश भक्तोंके लिए Ganesh Images, lord ganesha images और Ganesh Photo उनके मोबाईल के स्क्रीन पर हो तो इसका आनंद कुछ और ही होता है. इसके साथ आइये देखते भगवान गणेश के ज्योतिष और ज्योतिष के आलावा कुछ खास तथ्य.

फोटो सौजन्य – विशाल शिंदे, त्रिमूर्ति स्टूडियो

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भगवान गणेश जी के जन्म के तथ्य

शिवपुराण के अनुसार माता पार्वती की दो सखियाँ जया और विजया इनके सुझाव पर गणेश जी का जन्म हुआ. जो की माता पार्वती के निर्देशों का पालन करे. क्यूंकि शिवगण और नंदी महादेव की भक्ति व्यस्त रहते थे.

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माता पार्वती का उपवास और भगवान गणेश जी का जन्म

ब्रह्मवैवर्त पुराण अनुसार माता पार्वती ने भगवान गणेश के जन्म से पूर्व अपने संतान के लिए पुण्यक उपवास रखा था. इसका परिणाम तुरंत परिणाम देखा गया. और बहोत ही असाधारण तरीके से भगवान गणेश का जन्म हुआ. और माता पार्वती की संतान प्राप्ति की इच्छा पूर्ण हो गई.

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महादेव का श्राप बना गणेश जी के जन्म का कारण

ब्रह्मवैवर्त पुराण की जानकारी अनुसार महादेव ने सूर्य देव पर त्रिशूल से क्रोधित होकर वार कर दिया था. उस वक्त सूर्य के पिता अपनी संतान की हालत देखकर क्रोधित और नाराज हो गए. और महादेव को श्राप दे दिया. की महादेव को अपने पुत्र के शरीर का खंडन देखना होगा.

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इसलिए गणेश पूजा में तुलसी के पत्ते है वर्जित

ब्रह्मवैवर्त पुराण अनुसार माता तुलसी गंगा नदी को पार कर रही थी. उस वक्त गंगा किनारे भगवान गणेश ध्यान साधना कर रहे थे. माता तुलसी भगवान गणेश का रूप देख कर उनकी तरफ मोहित हो गई. उनके समीप जाकर माता तुलसी ने उन्हें सीधा विवाह का प्रस्ताव दे डाला. लेकिन भगवान गणेश ने इस प्रस्ताव को अस्वीकार किया. इससे माता तुलसी नाराज हो गई. और भगवान गणेश को जल्द विवाह होनेका श्राप दे डाला. उसके विरुद्ध भगवान गणेश ने भी माता तुलसी को पौधा होने का श्राप दे डाला. और माता तुलसी एक पौधा बन गई

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भगवान गणेश जी का परिवार कैसा था ?

शिवपुराण के अनुसार भगवान गणेश के दो विवाह हो गए थे. जिनके नाम रिद्धि और सिद्धि थे. इसके साथ भगवान गणेश को दो पुत्र थे जिनका नाम शुभ और लाभ थे.

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भगवान गणेश जी का एकदंत नाम कैसे प्रचलित हुआ ?

भगवान परशुराम महादेव का दर्शन लेने कैलास पर्वत पर गए थे. महादेव साधना में व्यस्त थे. इसलिए भगवान गणेश उनके द्वार के बाहर द्वारपाल का काम कर रहे थे. भगवान गणेश परशुरामजी को नहीं जानते थे. भगवान परशुराम विष्णु के अवतार माने जाते है. स्वयं महादेव ने परशुराम को खड्ग परसु उन्हें दे दिया था. भगवान गणेश ने परशुराम को अंदर जाने से रोका तो परशुराम क्रोधित होगये. और भगवान गणेश पर अपना अस्त्र चला दिया. इस युद्ध में भगवान गणेश का एक दांत टूट गया. इसके बाद भगवान गणेश को एक दंत के नाम से जाने जाना लगा.

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भगवान गणेश जी को क्यों है दूर्वा इतनी पसंद ?

शिवपुराण के अनुसार दूर्वा नाम की बालिका भगवान गणेश की बड़ी भक्त थी. वो हमेश भगवान गणेश की सेवा करना चाहती थी. माता पार्वती ने दूर्वा को घास के रूप में बदल दिया. एक दिन भगवान गणेश ने अनलगासुर नामक राक्षस को निगल लिया. इसके बाद भगवान गणेश के शरीर का तापमान काफी गर्म हो गया. इसपर माता पारवती ने उन्हें दूर्वा को अपने सर पर रखने का सुझाव दिया. जिससे भगवान गणेश के शरीर का तापमान ठीक हो गया. और भगवान गणेश को दूर्वा प्रिय हो गई.

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भगवान गणेश जी को कैसे मिला अपना नया वाहन मूषक ?

महिषासुर राक्षस का पुत्र गजासुर आम जनता और सभी देवताओं को पीड़ित करता था. साधुओं के यज्ञ में बढ़ा पहुंचाता था. भगवान गणेश ने गजासुर से युद्ध किया और उसे मूषक यानि चूहे के रूप में परवर्तित किया. इसके बाद गजासुर अपने गलती का एहसास हो गया. और उसने भगवान गणेश से माफ़ी मांगली. गजासुर ने भगवान् गणेश की सेवा करने के लिए विनती की. तो भगवान गणेश ने गजासुर को अपना वाहन बना डाला.

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नया काम करने से पहले क्यों की जाती है भगवान गणेश की पूजा ?

शिवपुराण के अनुसार जब भगवान शिव त्रिपुरासुर राक्षस को वध करने के लिए निकले थे. तब एक आकाशवाणी हुई. और आकाशवाणी में यह बताया गया की जबतक भगवान शिव भगवान गणेश की पूजा नहीं करते तब तक, त्रिपुरासुर का वध नहीं कर पायेंगे. इसके बाद हर नए काम करने से पहले भगवान गणेश की पूजा होने लगी.

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महाभारत के लेखन के पीछे की कहानी

महाभारत का लेखन ऋषि व्यास के कहने पर स्वयं श्रीगणेश ने किया है. जब महाभारत की कथा सुनकर भगवान गणेश लिख रहे थे, तो लिखते समय वो रुकना बिलकुल नहीं चाहते थे. ऐसे में उनकी कलम टूट गई थी. तब भगवान गणेश अपना एक दांत तोड़कर उससे कलम बनाई और महाभारत का लेखन पूर्ण किया.

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भगवान गणेश की किस तरह की प्रतिमा स्थापित नहीं करना चाहिए ?

किसी भी नए काम को शुरू करने से पहले भगवान गणेश की पूजा अवश्य करनी चाहिए. घर में खुशाली और समृद्धि के लिए घर में मोदक और मूषक के साथ गणेश प्रतिमे अवश्य लगाए इससे घरमे समृद्धि आती है. ठीक से आराधना करने पर भगवान गणेश जी शीघ्र ही शुभ फल प्रदान करते है. लेकिन इसके भगवान गणेश सबसे अधिक क्रोधी स्वभाव के देवता भी माने जाते है. इसलिए घर में बाये दिशा की ओर की सूंड वाले भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित करने से बचना चाहिए. अगर ऐसी प्रतिमा स्थापित हो चुकी है. तो रोज और मंगलवार के दिन भगवान गणेश की आराधना और प्रसाद में ढील नहीं रखनी चाहिए. वरना इससे सबंधित व्यक्ति दण्डित भी हो सकता है.

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जब कार्तिकेय और भगवान गणेश में हुई प्रतियोगिता

शिव पुराण के अनुसार एक दिन भगवान गणेश और उनके बड़े भाई कार्तिकीये के बिच स्पर्धा हो गई. कौन पहले पृथ्वी का भ्रमण कर पायेगा. कार्तिकेय का वाहन मोर था. और श्री गणेश का मूषक. कार्तिकेय को खुद पर विश्वास था की उसीकी ही विजय होगी. जब स्पर्धा शुरू हो गई तो कार्तिकेय अपने वाहन मोर के साथ पृथ्वी का एक भ्रमण पूर्ण करने के लिए निकल पड़ा. लेकिन भगवान गणेशने अपने माता और पिता की प्रदक्षिणा पूर्ण कर के अपनी जगह लौट गए.

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इसलिए स्त्रियों के लिए भगवान कार्तिकेय के दर्शन है वर्ज्य

काफी देर बाद जब कार्तिकेय कैलास लौटे. तो उन्हें पता चला, की भगवान गणेश तो अपने माता पिता की प्रदक्षिणा पूर्ण कर पाए है. तो वो आनंदित हुए. और खुद को विजयी घोषित करने लगे. इसके बाद भगवान गणेश ने उन्हें समझाया की माता पिता की एक प्रदक्षिणा पृथ्वी के प्रदक्षिणा के बराबर है. लेकिन वो माने नहीं। और झगड़ा माता पारवती तक जा पहुंचा. माता पार्वती ने भगवान गणेश की बात सही ठहराई। इस पर कार्यिकेय घुस्सा हो गए. और इसके बाद किसी भी स्त्री का मुख ना देखने की प्रतिज्ञा कर, अज्ञात स्थान चले गए. इसलिए स्त्रियों के लिए भगवान कार्तिकेय के दर्शन वर्ज्य है.

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